कल का पंचांग | Kal Ka Panchang – शनिवार, 1 अगस्त 2026

कल का पंचांग – नई दिल्ली

तिथि

तृतीया
कृष्ण पक्ष  |  समाप्त: 17:20

नक्षत्र

शतभिषा
समाप्त: 15:00

योग

शोभन
समाप्त: --:--

करण

विष्टि

वर्ज्यम्

08:47 – 09:11
सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
19:22

अशुभ समय

राहु काल
09:11 – 10:52
यमगण्ड
14:16 – 15:58
गुलिक काल
05:47 – 07:29

दुर्मुहूर्त

11:13 – 12:07 | 12:07 – 13:01

शुभ समय

अभिजीत मुहूर्त
12:07 – 13:01
ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:59
अमृत काल
09:47 – 10:11
दिनांक
01 Aug 2026
📍 28.6139°N  |  अयनांश: 24.2307°  |  चित्रपक्ष (Lahiri)

कल का पंचांग | Kal Ka Panchang – शनिवार, 1 अगस्त 2026 – नई दिल्ली

संवत्सर
प्रभव संवत्सर
ऋतु / माह
वर्षा ऋतुश्रावण माह
अयन
दक्षिणायण
तिथि
तृतीया (कृष्ण पक्ष), समाप्त 17:20
नक्षत्र
शतभिषा, समाप्त 15:00
योग
शोभन
करण
विष्टि
सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
19:22
राहु काल
09:11 – 10:52
यमगण्ड
14:16 – 15:58
गुलिक काल
05:47 – 07:29
वर्ज्यम्
08:47 – 09:11
दुर्मुहूर्त
11:13 – 12:07 | 12:07 – 13:01
अभिजीत मुहूर्त
12:07 – 13:01
ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:59
अमृत काल
09:47 – 10:11

कल का पंचांग शनिवार, 1 अगस्त 2026 नई दिल्ली के लिए: कल की तिथि तृतीया (कृष्ण पक्ष) रहेगी, करण विष्टि, नक्षत्र शतभिषा, योग शोभन. नई दिल्ली में कल सूर्योदय 05:47 और सूर्यास्त 19:22 होगा। राहु काल 09:11 – 10:52 — इस समय शुभ कार्य न करें। वर्ज्यम् 08:47 – 09:11. दुर्मुहूर्त 11:13 – 12:07 | 12:07 – 13:01. अभिजीत मुहूर्त 12:07 – 13:01 — दिन का सबसे शुभ समय। अमृत काल 09:47 – 10:11. ब्रह्म मुहूर्त 04:11 – 04:59 — ध्यान और पूजा के लिए श्रेष्ठ।

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू वैदिक ज्योतिष की कैलेंडर प्रणाली है जिसमें पाँच तत्व होते हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा की स्थिति), योग (सूर्य-चंद्र संयोग), और करण (अर्ध-तिथि)। इनके आधार पर मुहूर्त, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठान तय किए जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल – कल का पंचांग

कल का राहु काल कब है?

कल शनिवार, 1 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में राहु काल 09:11 – 10:52 रहेगा। इस समय शुभ कार्य, यात्रा और नए काम शुरू करने से बचें।

कल की तिथि क्या है?

कल शनिवार, 1 अगस्त 2026 को तिथि तृतीया (कृष्ण पक्ष) रहेगी, जो 17:20 तक चलेगी।

कल का नक्षत्र क्या है?

कल नक्षत्र शतभिषा रहेगा जो 15:00 तक चलेगा। इस नक्षत्र के अनुसार वर्ज्यम् 08:47 – 09:11 रहेगा।

कल का अभिजीत मुहूर्त कब है?

कल शनिवार, 1 अगस्त 2026 को अभिजीत मुहूर्त 12:07 – 13:01 रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय है।

कल का करण क्या है?

कल का करण विष्टि है। करण तिथि का आधा भाग होता है जो मुहूर्त निर्धारण में महत्वपूर्ण है।

kal ka panchang kya hai?

Kal ka panchang (शनिवार, 1 अगस्त 2026) — tithi: तृतीया, nakshatra: शतभिषा, yoga: शोभन, rahu kaal: 09:11 – 10:52, abhijit muhurat: 12:07 – 13:01.

कल का पंचांग क्यों देखना जरूरी है?

कल का पंचांग देखना भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही एक पवित्र परंपरा है। हमारे पूर्वज हर शुभ कार्य — चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार की शुरुआत हो, या यात्रा — पंचांग देखकर ही निर्धारित करते थे। आज के डिजिटल युग में kal ka panchang देखना और भी आसान हो गया है, लेकिन सटीक जानकारी मिलना उतना ही जरूरी है।

पंचांग केवल एक कैलेंडर नहीं है — यह काल का वैज्ञानिक मापन है। इसमें सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय गणना के आधार पर दिन के शुभ-अशुभ समय, तिथि, नक्षत्र, योग और करण की विस्तृत जानकारी मिलती है। Bavishyavani पर आप जो कल का पंचांग देखते हैं, वह Lahiri Ayanamsa पर आधारित Drik Ganit (वास्तविक खगोलीय अवलोकन) पद्धति से आपके शहर के सूर्योदय के अनुसार गणना की जाती है।

📌 महत्वपूर्ण: पंचांग की गणना स्थान-विशेष होती है। दिल्ली और मुंबई के राहु काल और अभिजीत मुहूर्त के समय में अंतर होता है। ऊपर दिए गए विजेट में अपना शहर बदलकर आप कल का सटीक पंचांग देख सकते हैं।

पंचांग के पाँच अंग — विस्तृत जानकारी

"पंचांग" शब्द दो संस्कृत शब्दों से बना है — पंच (पाँच) और अंग (भाग)। इन पाँच अंगों के आधार पर ही दिन की संपूर्ण ज्योतिषीय गणना होती है। आइए कल के पंचांग को समझने के लिए इन पाँचों अंगों को विस्तार से जानते हैं।

1. तिथि (Tithi) — चंद्र दिवस

तिथि चंद्रमा की गति पर आधारित होती है। जब चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है, तब एक तिथि पूरी होती है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष में (अमावस्या से पूर्णिमा तक) और 15 कृष्ण पक्ष में (पूर्णिमा से अमावस्या तक)। कल की तिथि जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि:

  • एकादशी, अष्टमी, चतुर्दशी जैसी तिथियों पर व्रत और पूजा का विशेष महत्व है
  • कुछ तिथियाँ विवाह, गृहप्रवेश के लिए अशुभ मानी जाती हैं (जैसे चतुर्थी, नवमी)
  • पूर्णिमा और अमावस्या पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं
  • तिथि के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा का क्रम निर्धारित होता है

2. नक्षत्र (Nakshatra) — चंद्रमा की स्थिति

हिंदू ज्योतिष में 27 नक्षत्र होते हैं। कल का नक्षत्र चंद्रमा की आकाश में उस दिन की स्थिति बताता है। प्रत्येक नक्षत्र लगभग 13°20' आकाश में फैला होता है और चंद्रमा एक नक्षत्र में करीब सवा दिन रहता है। नक्षत्र के आधार पर:

  • वर्ज्यम् का समय निर्धारित होता है — जब कोई महत्वपूर्ण काम नहीं करना चाहिए
  • अमृत काल तय होता है — सबसे शुभ लघु कालखंड
  • यात्रा के लिए शुभ नक्षत्र चुने जाते हैं
  • नवजात शिशु का नाम उसके जन्म नक्षत्र से रखा जाता है
💡 गुरु योगेश्वर की सलाह: रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, श्रवण और रेवती — ये 10 नक्षत्र यात्रा और नए कार्यों के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

3. योग (Yoga) — सूर्य-चंद्र का संयोग

योग की गणना सूर्य और चंद्रमा की देशांश (longitude) को जोड़कर और उसे 27 से भाग देकर की जाती है। 27 योगों में से कुछ शुभ हैं और कुछ अशुभ। कल का योग जानना इसलिए महत्वपूर्ण है:

शुभ योगअशुभ योग (टालें)अति शुभ योग
प्रीति, आयुष्मानविष्कुम्भ, अतिगण्डसिद्धि, अमृत सिद्धि
सौभाग्य, शोभनशूल, गण्डसर्वार्थसिद्धि
सुकर्मा, धृतिव्याघात, व्यतीपातरवि पुष्य योग
हर्षण, वज्रपरिघ, वैधृतिगुरु पुष्य योग
ध्रुव, ब्रह्मविष्कुम्भअमृत सिद्धि योग

4. करण (Karan) — अर्ध-तिथि

करण तिथि का आधा भाग होता है। प्रत्येक तिथि में दो करण होते हैं। 60 करणों में से 4 स्थिर (शकुनि, चतुष्पद, नाग, किंस्तुघ्न) और 7 चर (बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि/भद्रा) हैं। कल का करण महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  • भद्रा (विष्टि करण) में शुभ कार्य वर्जित हैं — रक्षाबंधन और होलिका दहन भी भद्रा में नहीं होते
  • बव, बालव, कौलव करण में व्यापारिक कार्य शुभ रहते हैं
  • शकुनि और नाग करण में सावधानी बरतनी चाहिए

5. वार (Vaar) — सप्ताह का दिन

सप्ताह के प्रत्येक दिन का एक स्वामी ग्रह होता है और उसी के अनुसार दिन का स्वभाव तय होता है। सोमवार चंद्रमा का, मंगलवार मंगल का, बुधवार बुध का, गुरुवार बृहस्पति का, शुक्रवार शुक्र का, शनिवार शनि का और रविवार सूर्य का दिन होता है।

कल का राहु काल — जानें और सावधान रहें

राहु काल (Rahu Kaal) प्रतिदिन का एक ऐसा कालखंड है जिसमें शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 भागों में बाँटकर एक भाग राहु काल के लिए निर्धारित किया जाता है। कल का राहु काल आपके शहर के सूर्योदय के अनुसार बदलता है, इसलिए ऊपर अपना शहर जरूर सेट करें।

वार (दिन)राहु काल का क्रमअनुमानित समय (दिल्ली)
रविवार8वाँ भाग4:30 PM – 6:00 PM
सोमवार2वाँ भाग7:30 AM – 9:00 AM
मंगलवार7वाँ भाग3:00 PM – 4:30 PM
बुधवार5वाँ भाग12:00 PM – 1:30 PM
गुरुवार6वाँ भाग1:30 PM – 3:00 PM
शुक्रवार4वाँ भाग10:30 AM – 12:00 PM
शनिवार3वाँ भाग9:00 AM – 10:30 AM
⚠️ राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए: नया व्यापार शुरू करना, विवाह, गृहप्रवेश, वाहन खरीदना, लंबी यात्रा शुरू करना, महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करना। हालाँकि राहु से संबंधित कार्यों (जैसे धातु व्यापार, तकनीकी कार्य) में यह समय उचित माना जाता है।

कल का शुभ मुहूर्त — अभिजीत, ब्रह्म और अमृत काल

अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurta)

अभिजीत मुहूर्त दिन का सबसे शुभ कालखंड माना जाता है। यह मध्याह्न के आसपास लगभग 48 मिनट का होता है — सूर्योदय से सूर्यास्त के ठीक मध्य में। इस मुहूर्त में कोई भी शुभ कार्य बिना पंचांग देखे किया जा सकता है। यहाँ तक कि अन्य दोष होने पर भी अभिजीत मुहूर्त में कार्य करना उचित माना जाता है।

💡 विशेष: बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं होता, क्योंकि उस दिन श्रवण नक्षत्र (28वाँ नक्षत्र) अभिजीत के समय पर होता है। इसलिए बुधवार को अन्य मुहूर्त का उपयोग करें।

ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurta)

ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले शुरू होता है और सूर्योदय से 48 मिनट पहले समाप्त होता है। यह ध्यान, योग, प्राणायाम, वेद-पाठ और अध्ययन के लिए अत्युत्तम समय है। कल का ब्रह्म मुहूर्त ऊपर दिए गए पंचांग में देखें।

  • इस समय वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा सर्वाधिक होती है
  • मन की शांति और एकाग्रता सबसे अधिक होती है
  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करने से दिन शुभ रहता है

अमृत काल (Amrit Kaal)

अमृत काल नक्षत्र के आधार पर निर्धारित होता है। यह लगभग 24 मिनट का एक अत्यंत शुभ कालखंड होता है जिसमें दवा लेना, नया कार्य शुरू करना या पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। "अमृत" नाम ही इसके महत्व को दर्शाता है।

कल के अशुभ समय — यमगण्ड, गुलिक और दुर्मुहूर्त

यमगण्ड (Yamaganda)

यमगण्ड भी राहु काल की तरह एक अशुभ कालखंड है जो प्रत्येक दिन लगभग 90 मिनट का होता है। यह मृत्यु के देवता यम से संबंधित माना जाता है। कल का यमगण्ड समय जानने के लिए ऊपर का पंचांग देखें।

गुलिक काल (Gulika Kaal)

गुलिक शनि का पुत्र माना जाता है। गुलिक काल भी प्रतिदिन आता है और इसमें शुभ कार्यों से बचना चाहिए। तीनों अशुभ काल — राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल — प्रतिदिन अलग-अलग होते हैं।

दुर्मुहूर्त (Durmuhurta)

दुर्मुहूर्त प्रतिदिन दो बार आता है, प्रत्येक लगभग 48 मिनट का। यह सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय का एक निश्चित भाग होता है जो वार के अनुसार बदलता है। इस समय में नए कार्यों की शुरुआत, यात्रा और महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचना चाहिए।

वर्ज्यम् (Varjyam)

वर्ज्यम् नक्षत्र-आधारित एक अशुभ कालखंड है जो प्रतिदिन लगभग 24 मिनट का होता है। इस समय में नए कार्यों की शुरुआत वर्जित मानी जाती है। "वर्ज्यम्" का अर्थ ही "त्यागने योग्य" है। इसका समय हर दिन के नक्षत्र के अनुसार बदलता रहता है।

अलग-अलग शहरों के लिए कल का पंचांग

भारत एक विशाल देश है और पूर्व से पश्चिम तक सूर्योदय के समय में लगभग 2 घंटे का अंतर होता है। इसीलिए कल का पंचांग दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु — सभी शहरों के लिए अलग-अलग होता है। ऊपर दिए गए Kal Ka Panchang विजेट में अपना शहर टाइप करें — यह GPS या मैन्युअल सिटी इनपुट से आपके शहर का सटीक पंचांग देगा।

शहरअक्षांश (Lat)देशांतर (Lon)समय क्षेत्र अंतर
नई दिल्ली28.61°N77.21°EIST (default)
मुंबई19.08°N72.88°E~20 min पीछे दिल्ली से
कोलकाता22.57°N88.36°E~24 min आगे दिल्ली से
चेन्नई13.08°N80.27°E~12 min आगे दिल्ली से
हैदराबाद17.39°N78.49°E~6 min आगे दिल्ली से
बेंगलुरु12.97°N77.59°E~2 min पीछे दिल्ली से
लखनऊ26.85°N80.95°E~14 min आगे दिल्ली से
जयपुर26.91°N75.79°E~6 min पीछे दिल्ली से

ऊपर दिए गए विजेट में 📍 आइकन पर क्लिक करके आप अपना GPS स्थान ऑटोमेटिक सेट कर सकते हैं, या शहर का नाम टाइप करके सर्च कर सकते हैं।

कल का पंचांग कैसे पढ़ें और उपयोग करें

कई लोग पंचांग देखना चाहते हैं लेकिन इसे पढ़ना मुश्किल लगता है। यहाँ हम बताते हैं कि kal ka panchang को सरल तरीके से कैसे समझें:

दैनिक जीवन में पंचांग का उपयोग

  1. सुबह उठते ही — ब्रह्म मुहूर्त देखें, उस समय उठने का प्रयास करें
  2. कोई भी नया काम शुरू करने से पहले — राहु काल, यमगण्ड और दुर्मुहूर्त जाँचें
  3. यात्रा से पहले — नक्षत्र देखें, शुभ नक्षत्र में यात्रा फलदायी होती है
  4. व्यापारिक लेन-देन — अभिजीत मुहूर्त या अमृत काल में करें
  5. पूजा-पाठ — ब्रह्म मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त में करें
  6. दवा शुरू करने से पहले — अमृत काल में दवा लेना शुभ माना जाता है
  7. घर से निकलने से पहले — वर्ज्यम् का समय जाँचें
🌟 गुरु योगेश्वर का संदेश: पंचांग का उपयोग डर से नहीं, बल्कि जागरूकता से करें। यह एक खगोलीय मार्गदर्शक है जो आपको समय की ऊर्जा के अनुसार कार्य करने में मदद करता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्षों के अनुभव से यह ज्ञान संकलित किया है। जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना हो, पंचांग अवश्य देखें।

हिंदू कैलेंडर और संवत्सर — कल का पंचांग का व्यापक संदर्भ

कल का पंचांग को समझने के लिए हिंदू कैलेंडर की व्यापक संरचना को जानना जरूरी है। हिंदू पंचांग में 60 संवत्सर (वर्ष) का एक चक्र होता है। वर्तमान में हम पराभव नाम संवत्सर में हैं (2024–2025)। प्रत्येक संवत्सर का एक अलग स्वभाव और प्रभाव माना जाता है।

हिंदू वर्ष में 6 ऋतुएँ होती हैं — वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर। वर्तमान में ग्रीष्म ऋतु और ज्येष्ठ माह चल रहा है। उत्तरायण (14 जनवरी से जुलाई मध्य) और दक्षिणायण (जुलाई मध्य से 14 जनवरी) — ये दोनों अयन शुभ-अशुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उत्तरायण देवताओं का दिन और दक्षिणायण उनकी रात मानी जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल — कल का पंचांग (FAQ)

कल का राहु काल कब है?

कल के राहु काल का समय आपके शहर के सूर्योदय के अनुसार बदलता है। ऊपर दिए गए कल का पंचांग विजेट में अपना शहर चुनें और सटीक राहु काल देखें। सामान्यतः राहु काल 90 मिनट का होता है और सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 भागों में बाँटकर निर्धारित किया जाता है। राहु काल में विवाह, गृहप्रवेश, यात्रा और नए व्यापार जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।

कल की तिथि क्या है?

कल की तिथि जानने के लिए ऊपर दिए गए Bavishyavani के कल का पंचांग विजेट में देखें। तिथि चंद्रमा की गति के अनुसार बदलती है और एक ही दिन में दो तिथियाँ भी हो सकती हैं। इसीलिए स्थान-विशेष गणना जरूरी है। पंचांग विजेट आपके शहर के सूर्योदय के अनुसार कल की सटीक तिथि, उसके समाप्ति समय और पक्ष (शुक्ल/कृष्ण) की जानकारी देता है।

कल का नक्षत्र क्या है?

कल का नक्षत्र चंद्रमा की आकाश में स्थिति से निर्धारित होता है। ऊपर के पंचांग विजेट में कल का नक्षत्र और उसके समाप्त होने का समय देखें। नक्षत्र के आधार पर वर्ज्यम् और अमृत काल निर्धारित होते हैं। यात्रा और शुभ कार्यों के लिए रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य जैसे नक्षत्र विशेष रूप से अनुकूल माने जाते हैं।

कल का अभिजीत मुहूर्त कब है?

अभिजीत मुहूर्त दोपहर के आसपास लगभग 48 मिनट का होता है। यह सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक मध्य में आता है। कल का अभिजीत मुहूर्त देखने के लिए ऊपर के पंचांग विजेट में अपना शहर चुनें। ध्यान रखें — बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं माना जाता। इस मुहूर्त में विवाह, गृहप्रवेश, व्यापार शुरू करना और महत्वपूर्ण निर्णय लेना अत्यंत शुभ होता है।

कल का करण क्या है?

करण तिथि का आधा भाग होता है। प्रत्येक तिथि में दो करण होते हैं। कल का करण ऊपर के पंचांग विजेट में देखें। विशेष रूप से भद्रा (विष्टि करण) पर ध्यान दें — इसमें शुभ कार्य वर्जित हैं। बव, बालव, और कौलव करण में व्यापारिक और दैनिक कार्य शुभ रहते हैं।

कल का वर्ज्यम् समय क्या है?

वर्ज्यम् नक्षत्र के आधार पर निर्धारित होने वाला लगभग 24 मिनट का अशुभ काल है। इस समय में नए कार्यों की शुरुआत, यात्रा और महत्वपूर्ण लेन-देन से बचना चाहिए। कल का वर्ज्यम् समय ऊपर दिए गए Bavishyavani पंचांग विजेट में देखें। यह जानकारी अधिकांश पंचांग वेबसाइटों पर नहीं मिलती — हम इसे भी दिखाते हैं।

kal ka panchang kaise dekhen? (कल का पंचांग कैसे देखें?)

Kal ka panchang dekhna bahut aasaan hai Bavishyavani par. Upar diye gaye widget mein apna shahar enter karein (ya GPS icon click karein), aur aapko mil jaayega kal ki tithi, nakshatra, rahu kaal, yamganda, abhijit muhurta, brahma muhurta, amrit kaal, varjyam, durmuhurta aur karan — sab kuch ek jagah par, bilkul muft. Aap kisi bhi shahar ke liye kal ka panchang dekh sakte hain — Delhi, Mumbai, Hyderabad, Kolkata, Chennai, Jaipur.

निष्कर्ष — Bavishyavani पर कल का पंचांग क्यों देखें?

Bavishyavani पर कल का पंचांग (Kal Ka Panchang) देखने के कई विशेष लाभ हैं:

  • सटीक गणना — Drik Ganit (वास्तविक खगोलीय) पद्धति, Lahiri Ayanamsa
  • शहर-आधारित — आपके शहर के सूर्योदय के अनुसार सटीक समय
  • सम्पूर्ण जानकारी — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल, यमगण्ड, गुलिक, अभिजीत, ब्रह्म, अमृत काल, वर्ज्यम्, दुर्मुहूर्त — सब एक जगह
  • निःशुल्क — कोई सदस्यता नहीं, कोई विज्ञापन नहीं
  • मोबाइल-फ्रेंडली — मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर पर समान रूप से काम करता है
  • विशेषज्ञ द्वारा सत्यापितगुरु योगेश्वर (14+ वर्ष अनुभव) की देखरेख में
  • कल, आज और परसों — ऊपर के नेविगेशन से किसी भी दिन का पंचांग देखें

हिंदू धर्म में पंचांग केवल एक कैलेंडर नहीं बल्कि जीवन का मार्गदर्शक है। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्षों की साधना और अनुसंधान के बाद इस ज्ञान को संकलित किया। आज जब विज्ञान भी खगोलीय गणनाओं की सटीकता की पुष्टि करता है, तो पंचांग का महत्व और भी बढ़ जाता है।

प्रतिदिन कल का पंचांग देखें, शुभ समय में कार्य करें और जीवन को सुखमय बनाएँ। किसी भी ज्योतिषीय प्रश्न के लिए हमसे संपर्क करें। Bavishyavani — आपकी भविष्यवाणी, आपकी भाषा में।